Admin का योगदान

निरालाजी की स्मृति में स्थापित एक संस्थान ने पिछले दिनों प्रसिद्ध साहित्यकार और इंजीनियर त्रिलोक सिंह ठकुरेला का सम्मान किया.संस्थान द्वारा उन्हें 'राष्ट्रीय साहित्य गौरव 'सम्मान से अलंकृत किया गया.
0 प्रतिक्रिया
हिन्दी का ये चिट्ठा विज्ञान और तकनीक की दुनिया की ताजातरीन जानकारी देता है. इसकी शुरुआत विज्ञान के प्राध्यापक और स्वतन्त्र लेखक शशांक जी ने की थी. विज्ञानपीडिया.कॉम नामक इस चिट्ठे को अब सिर्फ भारत ही नही बल्कि दुनिया के कई देशों में देखा जाता है.
0 प्रतिक्रिया
कल भोपाल में अटलजी के नाम पर स्थापित हिन्दी विश्वविद्यालय के स्थापना समारोह में भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने हिन्दी में अपना भाषण दिया. बंगाल के भद्र पुरुष के रूप में विख्यात प्रणव दा प्रधानमंत्री पद का प्रबल दावेदार माने जाते थे मगर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हिन्दी न जानने के कारण ही उन्होंने खुद को इस पद से अलग कर लिया था.
0 प्रतिक्रिया
अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह की गरिमा को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने और ऊँचाई दी.हिन्दी में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने दलगत राजनीति से परे हटकर पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी के बहुआयामी व्यक्तित्व की खूब सराहना की. यहाँ पढ़िए प्रणव दा के भाषण का मूल पाठ
0 प्रतिक्रिया
हिन्दी विश्वविद्यालय का शिलान्यास मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए जागती आँखों से देखे गए किसी सपने के पूरे होने जैसा है. इस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने दिल की बात कही और हिन्दी को उच्च शिक्षा और रोजगार की भाषा बनाने का संकल्प दोहराया.
0 प्रतिक्रिया
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज भारत के दूसरे हिन्दी विश्वविद्यालय के भवन की नींव रखी गयी. भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने यहाँ मुगालिया कोट में अटल जी के नाम पर आराम्भित हिंदी विश्वविद्यालय के भवन का शिलान्यास किया.इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार की भरपूर सराहना की और उम्मीद जताई कि यह विश्वविद्यालय श्री बाजपेयी के महान महान आदर्शो पर चलकर हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देगा.
0 प्रतिक्रिया
विश्व की सबसे वैज्ञानिक और सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी भले ही अभी तक संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा नही बन पाई है मगर संयुक्त राष्ट्र ने हिंदी में बोलना शुरू कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र रोज तो नही मगर हाँ हर सप्ताह हिंदी में बात करने लगा है.
0 प्रतिक्रिया
विश्व की सबसे वैज्ञानिक और सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी भले ही अभी तक संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा नही बन पाई है मगर संयुक्त राष्ट्र ने हिंदी में बोलना शुरू कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र रोज तो नही मगर हाँ हर सप्ताह हिंदी में बात करने लगा है.
0 प्रतिक्रिया
मध्यप्रदेश के एक छोटे से शहर में रहने वाले एक पर्यावरणविद, समाजसेवक और पत्रकार पिछले २७ वर्षों से अव्यवसायिक रूप से पर्यावरण पर केंद्रित हिंदी की एक मासिक पत्रिका का प्रकाशन कर रहे है. पर्यावरण पर केंद्रित ये हिंदी की पहली पत्रिका है. इसे नेट पर भी पढ़ा जा सकता है. विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व देखिये हिंदी में पर्यावरण की ये विशेष पहल.
0 प्रतिक्रिया
थाईलैंड में उच्च शिक्षा के दूसरे सबसे बड़े केंद्र में अब हिन्दी की स्थापना होने जा रही है. थाईलैंड के थामसट विश्वविद्यालय में जल्दी ही हिन्दी की एक पीठ स्थापित की जाएगी जिसमें हिन्दी और भारतीय संस्कृति के पाठ्यक्रम पढाए जाएंगे. ये घोषणा भारत और थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने संयुक्त रूप से की.
0 प्रतिक्रिया
से मिलिए
अमेरिका का एक नौजवान कई सालों से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहा था.वो किसी ऐसे रोचक आडियो वीडियो माध्यम को तलाश रहा था जिससे हिन्दी सीखना कुछ आसां हो जाए मगर अफसोस, उसे कही भी ऐसा कोई माध्यम नहीं मिला.आखिरकार उसने खुद कुछ ऐसा किया जिससे उसने खुद हिन्दी सीखी और फिर दूसरों को भी सिखाई.पढ़िए हिन्दी के एक ऐसे भक्त की कहानी जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के हज़ारों लोगों को हिन्दी सीखा रहा है.
रवींद्र नाथ ठाकुर संभवतः विश्व के एकमात्र कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया है.कवि,लेखक,साहित्यकार,संगीतकार होने के साथ-साथ वे चित्रकार भी थे.बहुत कम लोग जानते है कि उन्होंने बच्चों के लिए भी खूब रचनाएँ लिखी थी. आज उनकी जयन्ती है इस अवसर पर प्रस्तुत है विख्यात साहित्यकार श्री प्रकाश मनुजी के चिट्ठे से आभारपूर्वक ली गई गुरुदेव की ये बाल कविता.
पढ़िए लेखक, पत्रकार और कवि सुबोध श्रीवास्तव के कविता संग्रह सरहदें की समीक्षा आचार्य ऋषभदेव जी द्वारा
विमलजी के इस चिट्ठे पर आप उनकी रचनात्मकता से रूबरू होंगे.. इसे जरुर देखें
राजेन्द्र सिंह फरियादी उद्यमी भी है, कवि भी है और साहित्यकार भी। पानी को लेकर लिखी उनकी ये कविता खूब चर्चा में है। ये कविता यहां पढ़ी जा सकती है ।
गुजरात विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल की है. हिन्दी विभाग ने अपना पाठ्यक्रम इस चिट्ठे पर प्रस्तुत कर दिया है. उनका ये चिट्ठा सिर्फ उनके विभाग ही नहीं बल्कि पूरे देश के हिन्दी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. ।
अंतराल नामक इस चिट्ठे पर युवा कवि और शायर अश्विनी कुमार से मिलेंगे. इस चिट्ठे पर उन्होंने अपनी ग़ज़ल और कविताएँ प्रस्तुत की है. इस युवा को आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.
साहित्य मंथन संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है . कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. वेंकटेश्वर थे .