हिंदी जगत

मेरा अपना अँधेरे का एक टुकड़ा


सुनसान जीवन की रात में

अँधेरे का एक टुकड़ा है

वो मेरा अपना है,

क्यूंकि रौशनी के दावेदार

फैले हैं चारों ओर

उसके लिए पड़ता लड़ना है...


योगदान : Neeraj Kumar
प्रकाशन दिनांक :
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