हिंदी गौरव

हिंदी भाषा में ही क्यों ??


यूँ तो प्रत्येक भाषा का सभ्यता के विकास में, योगदान का महत्व अलग ही होता है। क्योंकि उस भाषा की उत्पत्ति सभ्यता के शुरूआती दौर से, हमारा परिचय जो कराती है। परन्तु भौतिकी की अपनी अलग ही भाषा होती है।

भौतिकी को समझने अथवा समझाने के लिए आवश्यक नहीं है कि हमसे हिंदी, अंग्रेजी अथवा किसी अन्य भाषा का प्रयोग करना आता ही हो। इसलिए मैं भाषा के चुनाव के लिए स्वतंत्र था।



हिंदी भाषा के चुनाव के प्रमुख बिंदु :




  1. अपनी खोज की बारीकियों को समझाने हेतु, हिंदी भाषा मेरे लिए उपयुक्त थी। क्योंकि हिंदी भाषा में अन्य भाषाओं के शब्दों को समावेशित करने का प्रावधान है।


  2. जब बात विज्ञान के लिए भाषा को चयनित करने की थी। तब विश्व स्तरीय वैज्ञानिकों के लेखों द्वारा पता चला कि गणित की उत्पत्ति व्यावहारिक ज्ञान के रूप में और मैथ्स की उत्पत्ति आत्म-ज्ञान या चिंतन के रूप में हुई है। तब हिंदी भाषा का चुनाव मेरे लिए “आधारभूत ब्रह्माण्ड” के विश्लेषण में सार्थक सिद्ध हुआ। क्योंकि हिंदी भाषा के शब्दों में व्यावहारिकता अन्य भाषाओं की तुलना में अधिक होती है।


  3. “आधारभूत ब्रह्माण्ड” की व्यापकता को देखते हुए। मेरा यह सोचना है कि हमारे देश की बड़ी आबादी का हिस्सा, इस विषय को जानने में आखिर पीछे क्यों रह जाए ?? और फिर वहीं हिंदी भाषा में विज्ञान का कार्य ना के बराबर हुआ है।


  4. विज्ञान को हमारे देश में उत्सुकता के साथ नहीं पढ़ा जाता। विज्ञान के प्रति हमारी दिलचस्पी ना के बराबर होती है। क्योंकि हमारे देश में हिंदी भाषा जानने वाले व्यक्तियों की संख्या अन्य भाषाओं को जानने वाले व्यक्तियों की तुलना में बहुत अधिक है। और वहीं भारत में सैद्धांतिक प्रकरण को दर्शन का नाम भी दिया जाता है।



हिंदी भाषा का प्रयोग कर, मैं मिथ्या को दूर करने का प्रयास कर रहा हूँ। ताकि भारत के निवासियों में विज्ञान के प्रति दिलचस्पी बड़े और वे दर्शन और सैद्धांतिक प्रकरण में फर्क समझ सकें। वैंसे तो मैं एक अभियंता हूँ। फिर भी आप अंग्रेजी भाषा को मेरी कमजोरी और हिंदी भाषा को मेरी ताकत समझ सकते हैं। आपका यह सोचना गलत नहीं होगा।


योगदान : अज़ीज़ राय
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